श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.342.6 
एवमस्यां व्यवस्थायां नारायणगुणाश्रयादजरामरादनिन्द्रियादग्राह्यादसम्भवात् सत्यादहिंस्राल्ललामाद् विविधप्रवृत्तिविशेषादवैरादक्षया-दमरादजरादमूर्तित: सर्वव्यापिन: सर्वकर्तु: शाश्वतस्तस्मात् पुरुष: प्रादुर्भूतो हरिरव्यय:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
इस अवस्था में अविनाशी, अजर, अमर, अचिन्त्य, अव्यय, सत्य, अहिंसक, सुन्दर, नाना प्रकार की विशेष प्रवृत्तियों का कारण, नारायण के गुणों का आश्रय लेकर, जो सनातन, अविनाशी, अक्षय, अजर, अजर, निराकार, सर्वव्यापी और कर्म करने वाला था, वह हरिका प्रकट हुआ॥6॥
 
In this state, Harika, the immortal, immortal, senseless, imperishable, impossible, truthful, non-violent, beautiful, the cause of various types of special tendencies, taking shelter of the qualities of Narayana, who was eternal, indestructible, inexhaustible, ageless, ageless, formless, omnipresent and doer of things, emerged. 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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