श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  12.342.58 
तच्छापादद्यापि क्षीयते सोमोऽमावास्यान्तरस्थ: पौर्णमासीमात्रेऽधिष्ठितो मेघलेखाप्रतिच्छन्नं वपुर्दर्शयति मेघसदृशं वर्णमगमत् तदस्य शशलक्ष्म विमलमभवत् ॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
उसी शाप के कारण आज भी चन्द्रमा कृष्णपक्ष की अमावस्या तक घटता-बढ़ता और शुक्लपक्ष की पूर्णिमा तक बढ़ता रहता है। उसका गोलाकार रूप मेघ की एक काली रेखा से ढका हुआ दिखाई देता है। उसके शरीर पर खरगोश के समान चिह्न है और वह मेघ के समान श्याम वर्ण का है। वह स्पष्ट दिखाई देता है॥58॥
 
Due to the same curse, even today the moon keeps decreasing till the new moon in the Krishna Paksha and keeps increasing till the full moon in the Shukla Paksha. Its circular form appears covered with a dark line of cloud. There is a rabbit-like mark on his body and it is dark in color like a cloud. It appears clearly. 58॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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