श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  12.342.56 
अदितिर्वै देवानामन्नमपचदेतद् भुक्त्वासुरान् हनिष्यन्तीति तत्र बुधो व्रतचर्यासमाप्तावागच्छददितिं चावोचद् भिक्षां देहीति तत्र देवै: पूर्वमेतत् प्राश्यं नान्येनेत्यदितिर्भिक्षां नादादथ भिक्षाप्रत्याख्यान-रुषितेन बुधेन ब्रह्मभूतेनादिति: शप्ता अदितेरुदरे भविष्यति व्यथा विवस्वतो द्वितीयजन्मन्यण्डसंज्ञितस्य अण्डं मातुरदित्या मारितं स मार्तण्डो विवस्वानभवच्छ्राद्धदेव:॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
अदिति ने देवताओं के लिए रसोई तैयार कर दी थी, ताकि वे उसे खाकर दैत्यों का वध कर सकें। इसी समय बुध ने अपना व्रत पूर्ण करके अदिति के पास जाकर कहा, 'मुझे भिक्षा दीजिए।' अदिति ने सोचा कि यह भोजन तो देवताओं को ही करना चाहिए, अन्य किसी को नहीं; इसलिए उन्होंने बुध को भिक्षा नहीं दी। भिक्षा न मिलने से क्रोधित हुए ब्राह्मण बुध ने अदिति को शाप दे दिया कि 'विवस्वान नामक अण्ड के दूसरे जन्म के समय अदिति के उदर में पीड़ा होगी।' उस पीड़ा से माता अदिति के उदर में स्थित अण्डा मर गया। मृत अण्डे से उत्पन्न होने के कारण श्राद्धदेव संज्ञक विवस्वान मार्तण्ड नाम से प्रसिद्ध हुए ॥56॥
 
Aditi had prepared the kitchen for the gods so that they could eat it and kill the demons. At this time, after completing his fast, Mercury went to Aditi and said, 'Give me alms.' Aditi thought that only the gods should eat this food, not anyone else; That's why he did not give alms to Mercury. The Brahmin Buddha, who was angry at not getting the alms, cursed Aditi that 'At the time of the second birth of Anda named Vivasvan, Aditi will have pain in her stomach.' The egg in the stomach of Mother Aditi was killed by that pain. Due to his emergence from a dead egg, Shraddhadev Sangyaka became famous by the name Vivasvan Martand. 56॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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