श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  12.342.55 
भृगुणा महर्षिणा शप्तोऽग्नि: सर्वभक्षत्वमुपानीत:॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
महर्षि भृगु के श्राप के कारण अग्निदेव सर्वभक्षी बन गये। 55॥
 
Due to the curse of Maharishi Bhrigu, Agnidev became omnivorous. 55॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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