| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय » श्लोक 49 |
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| | | | श्लोक 12.342.49  | | तामथ पत्नीं कृशां ग्लानां चेन्द्रो दॄष्ट्वा चिन्तयाम्बभूव अहो मम दु:खमिदमुपगतं नष्टं हि मामिय-मन्विष्य यत्पत्न्यभ्यगमद् दु:खार्तेति तामिन्द्र उवाच कथं वर्तयसीति सा तमुवाच नहुषो मामाह्वयति पत्नीं कर्तुं कालश्चास्य मया कृत इति तामिन्द्र उवाच गच्छ नहुषस्त्वया वाच्योऽपूर्वेण मामृषियुक्तेन यानेन त्वमधिरूढ उद्वहस्वेति इन्द्रस्य महान्ति वाहनानि सन्ति मन:प्रियाण्यधिरूढानि मया त्वमन्येनोपयातुमर्हसीति सैवमुक्ता हृष्टा जगामेन्द्रोऽपि बिसग्रन्थिमेवाविवेश भूय:॥ ४९॥ | | | | | | अनुवाद | | अपनी पत्नी शची को दुर्बल एवं दुःखी देखकर इन्द्र मन ही मन कहने लगे- 'हाय! यह बड़े दुःख की बात है कि मैं यहाँ छिपा बैठा हूँ और मेरी पत्नी दुःख से व्याकुल होकर मुझे खोजती हुई यहाँ आई है।' इस प्रकार खेद प्रकट करते हुए इन्द्र ने अपनी पत्नी से कहा- 'देवी! आपके दिन कैसे व्यतीत हो रहे हैं?' शची बोली- 'हे प्रिये! राजा नहुष ने इन्द्र बनकर मुझे अपनी पत्नी बनाने के लिए बुलाया है। मुझे इसके लिए कुछ ही दिन मिले हैं और मैंने निर्धारित समय के बाद उनकी आज्ञा का पालन करने का वचन दिया है।' तब इन्द्र ने उनसे कहा- 'जाकर नहुष से इस प्रकार कहो- 'राजन्! ऋषियों द्वारा खींचे जाने वाले एक अद्भुत वाहन पर सवार होकर आओ और मुझे अपनी सेवा में ले लो। इन्द्र के पास अनेक महान वाहन हैं, जो उसके मन को भाते हैं, किन्तु मैं उन सब पर पहले ही आरूढ़ हो चुकी हूँ; अतः आप उन सबसे भिन्न किसी अन्य अद्वितीय वाहन पर सवार होकर मेरे पास आइए।' इन्द्र के कहने पर शची प्रसन्नतापूर्वक लौट गईं और इन्द्र भी पुनः कमलनाल की गाँठ में प्रवेश कर गए। | | | | Seeing his wife Shachi weak and sad, Indra started saying to himself- 'Oh! It is a matter of great sorrow that I am sitting here hidden and my wife, distraught with grief, has come here searching for me.' Expressing regret in this way, Indra said to his wife- 'Goddess! How are you spending your days?' Shachi said- 'My dear! King Nahush has pretended to be Indra and is calling me to make me his wife. I have got only a few days for this and I have promised to obey him after the stipulated time.' Then Indra said to her- 'Go and tell Nahush like this- 'King! Come riding on a wonderful vehicle drawn by sages and take me to your service. Indra has many great vehicles which are pleasing to his heart, but I have already mounted them all; therefore, you must come to me in some other unique vehicle, different from all of them.' At Indra's suggestion, Shachi returned happily, and Indra too once again entered the knot of the lotus stem. | | ✨ ai-generated | | |
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