| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय » श्लोक 48 |
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| | | | श्लोक 12.342.48  | | अथ शची दु:खशोकार्ता भर्तृदर्शनलालसा नहुषभयगृहीता बृहस्पतिमुपागच्छत् स च तामत्युद्विग्नां दृष्ट्वैव ध्यानं प्रविश्य भर्तृकार्यतत्परां ज्ञात्वा बृहस्पतिरुवाचानेनैव व्रतेन तपसा चान्विता देवीं वरदामुपश्रुतिमाह्वय तदा सा ते इन्द्रं दर्शयिष्यतीति साऽथ महानियमस्थिता देवीं वरदामुपश्रुतिं मन्त्रैराह्वयति सोपश्रुति: शचीसमीपमगादुवाच चैनामियमस्मीति त्वयाऽऽहूतोपस्थिता किं ते प्रियं करवाणीति तां मूर्ध्ना प्रणम्योवाच शची भगवत्यर्हसि मे भर्तारं दर्शयितुं त्वं सत्या ऋता चेति सैनां मानसं सरोऽनयत् तत्रेन्द्रं बिसग्रन्थिगतमदर्शयत् ॥ ४८॥ | | | | | | अनुवाद | | इसके बाद नहुष से भयभीत शची शोक और शोक से आकुल होकर अपने पति के दर्शन के लिए उत्सुक होकर बृहस्पतिजी के पास गई। उसे अत्यन्त व्याकुल देखकर ध्यान में मग्न बृहस्पतिजी ने जान लिया कि वह अपने पति के कार्य में लगी हुई है। तब उन्होंने शची से कहा—‘देवी! इस व्रत और तप से संपन्न होकर वरदायिनी देवी उपश्रुतिका का आह्वान करो, तब वे तुम्हें इन्द्र का दर्शन कराएंगी।’ गुरु की यह आज्ञा पाकर महाअनुष्ठान हेतु तत्पर शची ने मन्त्रों द्वारा वरदायिनी देवी उपश्रुतिका का आह्वान किया, तब उपश्रुतिदेवी शची के पास आईं और उनसे बोलीं—‘इन्द्राणी! मैं तुम्हारे सम्मुख खड़ी हूँ। तुमने मुझे पुकारा और मैं तुरन्त प्रकट हो गई। कहो, मुझे तुम्हारा कौन-सा प्रिय कार्य करना चाहिए?’ शची ने देवी के चरणों में सिर रखकर प्रणाम किया और कहा—‘भगवती! मुझे मेरे पति का दर्शन कराने की कृपा करो। तुम सत्य और ऋत हो।’ उपश्रुति शची को मानसरोवर ले गईं। वहाँ उन्होंने कमल की गांठों में छिपे हुए इंद्र को दिखाया। 48. | | | | After this, Shachi, scared of Nahush, went to Brihaspatiji, overwhelmed with grief and sorrow and eager to see her husband. Seeing her very agitated, Brihaspatiji, being absorbed in meditation, came to know that she was engaged in the work of her husband. Then he said to Shachi—‘Devi! Completed with this fast and penance, invoke the boon-giving goddess Upashrutika, then she will make you see Indra.’ On receiving this order from the Guru, Shachi, who was ready for the great ritual, invoked the boon-giving goddess Upashrutika through mantras, then Upashrutidevi came near Shachi and said to her—‘Indrani! I am standing in front of you. You called me and I immediately appeared. Tell me, which of your favourite tasks should I do?’ Shachi bowed down by placing her head at the feet of the goddess and said—‘Bhagvati! Please be kind enough to make me see my husband. You are the truth and the Rta.' Upashruti took Shachi to Manasarovar. There she showed her Indra hidden in the knots of the lotus. 48. | | ✨ ai-generated | | |
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