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mahabharat 12.342.42: अब इन्द्र के समक्ष द्विविध ब्रह्महत्या प्रकट हुई। उससे भयभीत होकर इन्द्र देवराज का सिंहासन छोड़कर मानसरोवर के जल में उत्पन्न एक शीतल कमल के पास चले गए। वहाँ अणिमा और ऐश्वर्य की सहायता से इन्द्र ने अणु मात्र का रूप धारण कर कमल की मूल ग्रंथि में प्रवेश किया। 42॥   |   mahabharat अध्याय 12.342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  12.342.42 
तस्यां द्वैधीभूतायां ब्रह्मवध्यायां भयादिन्द्रो देवराज्यं पर्यत्यजदप्सु सम्भवां च शीतलां मानससरोगतां नलिनीं प्रतिपेदे तत्र चैश्वर्ययोगादणुमात्रो भूत्वा बिसग्रन्थिं प्रविवेश॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
अब इन्द्र के समक्ष द्विविध ब्रह्महत्या प्रकट हुई। उससे भयभीत होकर इन्द्र देवराज का सिंहासन छोड़कर मानसरोवर के जल में उत्पन्न एक शीतल कमल के पास चले गए। वहाँ अणिमा और ऐश्वर्य की सहायता से इन्द्र ने अणु मात्र का रूप धारण कर कमल की मूल ग्रंथि में प्रवेश किया। 42॥
 
Now double Brahmahatya appeared before Indra. Fearing him, Indra left the throne of Devraj and went to a cool lotus born in the waters of Manasarovar. There, with the help of Anima and Aishwarya, Indra took the form of a mere atom and entered the lotus root gland. 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)