| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय » श्लोक 41 |
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| | | | श्लोक 12.342.41  | | तस्य परमात्मन्यपसृते तान्यस्थीनि धाता संगृह्य वज्रमकरोत् तेन वज्रेणाभेद्येनाप्रधृष्येण ब्रह्मास्थिसम्भूतेन विष्णुप्रविष्टेनेन्द्रो विश्वरूपं जघान शिरसां चास्य च्छेदनमकरोत् तस्मादनन्तरं विश्वरूपगात्रमथनसम्भवं त्वष्ट्रोत्पादितमेवारिं वृत्रमिन्द्रो जघान॥ ४१॥ | | | | | | अनुवाद | | उनके परब्रह्म में लीन हो जाने पर, धाता ने उनकी अस्थियाँ एकत्रित करके वज्र का निर्माण किया। ब्राह्मण की अस्थि से निर्मित उस अभेद्य एवं अजेय वज्र से, जिसमें भगवान विष्णु प्रविष्ट थे, इन्द्र ने विश्वरूप का वध किया और उसके तीनों सिर काट डाले। तत्पश्चात् उसी वज्र से इन्द्र ने अपने शत्रु वृत्रासुर का वध किया, जिसे त्वष्टा प्रजापति ने विश्वरूप के शरीर का मंथन करके उत्पन्न किया था॥ 41॥ | | | | After he merged into the Supreme Being, Dhātā collected his bones and created the Vajraastra. With that impenetrable and invincible vajra made from the bone of a Brahmin in which Lord Vishnu had entered, Indra killed Vishwaroop and cut off his three heads. Thereafter, with the same vajra, Indra killed his enemy Vṛtrāsura, who was created by Tvaṣṭha Prajapati by churning the body of Vishwaroop.॥ 41॥ | | ✨ ai-generated | | |
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