श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.342.4 
आप इत्येवं ब्रह्मभूतसंज्ञकेऽद्वितीये प्रतिष्ठिते॥ ४॥
 
 
अनुवाद
सर्वत्र जल ही जल था। अन्य कोई तत्त्व दृष्टिगोचर नहीं हो रहा था, मानो एकमात्र अद्वितीय ब्रह्म ही अपनी महिमा में स्थित थे॥4॥
 
There was only water everywhere. No other element was visible, as if the one and only unique Brahma was established in his own glory. ॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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