श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  12.342.34 
अथ ता विश्वरूपोऽब्रवीदद्यैव सेन्द्रा देवा न भविष्यन्तीति ततो मन्त्रान् जजाप तैर्मन्त्रैरवर्धत त्रिशिरा एकेनास्येन सर्वलोकेषु यथावद् द्विजै: क्रियावद्भियज्ञेषु सुहुतं सोमं पपावेकेनान्नमेकेन सेन्द्रान् देवानथेन्द्रस्तं विवर्धमानं सोमपानाप्यायितसर्वगात्रं दॄष्ट्वा चिन्तामापेदे सह देवै:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
तब विश्वरूप ने उनसे कहा, 'आज ही इन्द्र आदि सभी देवता लुप्त हो जायेंगे।' ऐसा कहकर उन्होंने मन्त्रों का जाप आरम्भ किया। उन मन्त्रों के प्रभाव से उनकी शक्ति बहुत बढ़ गई। तीन मुखों वाले विश्वरूप अपने एक मुख से समस्त लोकों के श्रद्धालु ब्राह्मणों द्वारा यज्ञों में अर्पित सोमरस का पान करते थे, दूसरे मुख से अन्न खाते थे और तीसरे मुख से इन्द्र आदि देवताओं के तेज का पान करते थे। इन्द्र ने देखा कि विश्वरूप का सम्पूर्ण शरीर सोमपान से पुष्ट हो रहा है। यह देखकर देवताओं सहित इन्द्र को बड़ी चिंता हुई। 34।
 
Then Vishwaroop said to him, 'Today itself all the gods like Indra etc. will vanish.' Saying so, he started chanting mantras. His power increased a lot due to those mantras. With one of his mouths, Vishwaroop, who had three heads, used to drink the Soma juice offered in the yagnas by the devoted Brahmins of the whole world, with the other mouth he used to eat food and with the third mouth he used to drink the radiance of the gods like Indra etc. Indra saw that Vishwaroop's whole body was getting nourished by drinking Soma. Seeing this, Indra along with the gods got very worried. 34.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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