श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.342.3 
सम्प्रक्षालनकालेऽतिक्रान्ते चतुर्युगसहस्रान्ते अव्यक्ते सर्वभूते प्रलये सर्वभूतस्थावरजङ्गमे ज्योतिर्धरणिवायुरहितेऽन्धे तमसि जलैकार्णवे लोके॥ ३॥
 
 
अनुवाद
एक हजार चतुर्युग बीत जाने पर समस्त लोकों का प्रलयकाल आ गया। समस्त तत्त्व अव्यक्त में विलीन हो गए। समस्त चर-अचर प्राणी लुप्त हो गए। पृथ्वी, अग्नि और वायु का नामोनिशान नहीं रहा। चारों ओर घोर अंधकार छा गया और सारा जगत समुद्र के जल में डूब गया।॥3॥
 
After one thousand Chaturyuga had passed, the time of destruction had arrived for all the worlds. All the elements had merged into the unmanifest. All the moving and immovable creatures had vanished. There was no trace of earth, fire and air. There was a deep darkness all around and the whole world had submerged in the waters of the ocean.॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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