श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.342.29 
अथ हिरण्यकशिपुं पुरस्कृत्य विश्वरूपमातरं स्वसारमसुरा वरमयाचन्त हे स्वसरयं ते पुत्रस्त्वाष्ट्रो विश्वरूपस्त्रिशिरा देवानां पुरोहित: प्रत्यक्षं देवेभ्यो भागमदात् परोक्षमस्माकं ततो देवा वर्धन्ते वयं क्षीयामस्तदेनं त्वं वारयितुमर्हसि तथा यथास्मान् भजेदिति॥ २९॥
 
 
अनुवाद
कुछ समय पश्चात् सभी दैत्य हिरण्यकशिपु को आगे करके विश्वरूप की माता के पास गए और उनसे वरदान माँगा- 'बहन! आपका यह पुत्र विश्वरूप, जिसके तीन सिर हैं, देवताओं का पुरोहित बन गया है। वह देवताओं को प्रत्यक्ष भाग देता है और हमें अप्रत्यक्ष रूप से भाग देता है। इसी कारण देवता बढ़ते जा रहे हैं और हम निरंतर दुर्बल होते जा रहे हैं। आप इसे रोकें, ताकि यह देवताओं को छोड़कर हमारा पक्ष ले ले।'
 
After some time, all the demons went to Vishwaroop's mother with Hiranyakashipu in the lead and asked for a boon from her- 'Sister! This son of yours, Vishwaroop, who has three heads, has become the priest of the gods. He gives a direct share to the gods and gives a share to us indirectly. Due to this, the gods are increasing while we are continuously getting weakened. You stop him, so that he leaves the gods and takes our side.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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