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mahabharat 12.342.25: इसी प्रकार रुद्र द्वारा किए गए अपने यज्ञ के विध्वंस से क्रोधित होकर दक्ष प्रजापति ने घोर तपस्या की और रुद्रदेव के मस्तक पर तीसरा नेत्र चिन्ह प्रकट किया ॥25॥   |   mahabharat अध्याय 12.342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  12.342.25 
क्रतुवधप्राप्तमन्युना च दक्षेण भूयस्तपसा चात्मानं संयोज्य नेत्राकृतिरन्या ललाटे रुद्रस्योत्पादिता॥ २५॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार रुद्र द्वारा किए गए अपने यज्ञ के विध्वंस से क्रोधित होकर दक्ष प्रजापति ने घोर तपस्या की और रुद्रदेव के मस्तक पर तीसरा नेत्र चिन्ह प्रकट किया ॥25॥
 
Similarly, Daksh Prajapati, angry at the destruction of his yajna performed by Rudra, performed great penance and revealed a third eye mark on the forehead of Rudradev. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)