श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  12.342.24 
अश्विनोर्ग्रहप्रतिषेधोद्यतवज्रस्य पुरन्दरस्य च्यवनेन स्तम्भितौ बाहू॥ २४॥
 
 
अनुवाद
महर्षि च्यवन ने अश्विनीकुमारों के लिए निर्धारित यज्ञभाग को रोकने के लिए वज्रधारी इन्द्र की दोनों भुजाएँ क्षीण कर दी थीं ॥24॥
 
Maharishi Chyavan had paralyzed both the arms of Indra, who was holding the thunderbolt, in order to stop the Yagya Bhag scheduled for the Ashwini Kumars. 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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