श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.342.22 
इत्थं च सुरासुरविशिष्टा ब्राह्मणा य एव मया ब्रह्मभूतेन पुरा स्वयमेवोत्पादिता: सुरासुरमहर्षयो भूतविशेषा: स्थापिता निगृहीताश्च॥ २२॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार ब्राह्मण देवताओं और दानवों से भी श्रेष्ठ हैं। पूर्वकाल में मैंने ही ब्रह्मा रूप धारण करके इन ब्राह्मणों की रचना की थी। देवता, दानव और ऋषि आदि विशिष्ट प्राणियों को ब्राह्मणों द्वारा उनके उचित स्थान पर प्रतिष्ठित किया जाता था और अपराध करने पर उन्हें दण्ड भी दिया जाता था॥ 22॥
 
In this way, Brahmins are superior to even the gods and demons. In the past, I myself had created these Brahmins in the form of Brahma. The special beings like gods, demons and sages were established in their rightful place by Brahmins and they were also punished when they committed a crime.॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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