श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.342.21 
वाक्संयमकाले हितस्य वरप्रदस्य देवदेवस्य ब्राह्मणा: प्रथमं प्रादुर्भूता ब्राह्मणेभ्यश्च शेषा वर्णा: प्रादुर्भूता:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
वाणी के संयम काल में सबके हितैषी, वरदाता और देवताओं के स्वामी ब्रह्माजी ने सबसे पहले ब्राह्मणों की रचना की, तत्पश्चात् ब्राह्मणों से शेष जातियों की उत्पत्ति हुई॥ 21॥
 
During the time of control of speech, the Brahmins were first created by Brahmaji, the well-wisher of all, the bestower of boons and the lord of gods. Then, the rest of the castes originated from the Brahmins.॥ 21॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd