श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.342.20 
वेदपुराणेतिहासप्रामाण्यान्नारायणमुखोद्‍गता: सर्वात्मान: सर्वकर्तार: सर्वभावाश्च ब्राह्मणाश्च॥ २०॥
 
 
अनुवाद
वेद, पुराण और इतिहास के प्रमाणों से सिद्ध है कि ब्राह्मण भगवान नारायण के मुख से उत्पन्न हुए हैं; अतः वह ब्राह्मण ही सर्वात्मा, कर्ता और समस्त भावनाओं का स्वरूप है ॥20॥
 
It is proved from the evidence of Vedas, Puranas and history that Brahmins originated from the mouth of Lord Narayana; Therefore, that Brahmin is the all-soul, the doer and the embodiment of all feelings. 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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