श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.342.2 
श्रीभगवानुवाच
हन्त ते वर्तयिष्यामि पुराणं पाण्डुनन्दन।
आत्मतेजोद्भवं पार्थ शृणुष्वैकमना मम॥ २॥
 
 
अनुवाद
श्री भगवान बोले - पाण्डुनन्दन! कुन्तीकुमार! मैं प्रसन्नतापूर्वक तुम्हें अपनी महिमा की उत्पत्ति की प्राचीन कथा सुनाता हूँ। तुम एकचित्त होकर मेरी बात सुनो॥2॥
 
Shri Bhagwan said – Pandunandan! Kuntikumar! I will gladly tell you the ancient story of the origin of my glory. You listen to me with one mind. 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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