श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.342.19 
नैषामुक्षा वहति नोत वाहा
न गर्गरो मथ्यति सम्प्रदाने।
अपध्वस्ता दस्युभूता भवन्ति
येषां राष्ट्रे ब्राह्मणा वृत्तिहीना:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
जिनके राज्य में ब्राह्मणों के लिए जीविका नहीं होती, उनके पास सवारी, बैल और घोड़े नहीं होते; वे दूसरों को देने के लिए दूध-दही के बर्तन नहीं मथते; वे अपनी मर्यादा का उल्लंघन करने वाले डाकू बन जाते हैं॥19॥
 
Those kings in whose kingdoms there is no livelihood for brahmins do not have rides, bulls and horses; they do not churn the pots of milk and curd to give to others and they become robbers, transgressing their limits.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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