श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.342.18 
नास्ति सत्यात् परो धर्मो नास्ति मातृसमो गुरु:।
ब्राह्मणेभ्य: परं नास्ति प्रेत्य चेह च भूतये॥ १८॥
 
 
अनुवाद
सत्य से बढ़कर कोई धर्म नहीं है। माता के समान कोई गुरु नहीं है और ब्राह्मण से बढ़कर इस लोक और परलोक का कल्याण करने वाला कोई नहीं है।॥18॥
 
There is no religion better than truth. There is no teacher like mother and there is no one better than Brahmins who can do good in this world and the next.॥ 18॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd