| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय » श्लोक 17 |
|
| | | | श्लोक 12.342.17  | ब्राह्मणानां मतिर्वाक्यं कर्म श्रद्धां तपांसि च।
धारयन्ति महीं द्यां च शैक्यो वागमृतं तथा॥ १७॥ | | | | | | अनुवाद | | जिस प्रकार छींक दूध, दही आदि को धारण करती है, उसी प्रकार ब्राह्मणों की बुद्धि, वाणी, कर्म, श्रद्धा, तप और वचन पृथ्वी और स्वर्ग को धारण करते हैं। | | | | Just as a sneeze holds milk, curd etc., similarly the intellect, speech, actions, faith, penance and words of Brahmins hold the earth and heaven. | | ✨ ai-generated | | |
|
|