श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.342.15 
एवमप्यग्निभूता ब्राह्मणा विद्वांसोऽग्निं भावयन्ति। अग्निर्विष्णु: सर्वभूतान्यनुप्रविश्य प्राणान् धारयति॥ १५॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार ब्राह्मण अग्निस्वरूप हैं। विद्वान ब्राह्मण अग्नि की पूजा करते हैं। अग्निदेव विष्णु हैं। वे सभी जीवों के भीतर प्रवेश करके उनके जीवन का संचालन करते हैं। 15॥
 
Thus Brahmins are in the form of fire. Learned Brahmins worship Agni. Agnidev is Vishnu. He enters inside all living beings and takes over their lives. 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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