श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 142
 
 
श्लोक  12.342.142 
यश्च ते कथित: पूर्वं क्रोधजेति पुन: पुन:।
तस्य प्रभाव एवाग्रे यच्छ्रुतं ते धनंजय॥ १४२॥
 
 
अनुवाद
धनंजय! मैंने क्रोधज नाम से तुम्हें बार-बार परिचित कराया है और जो कुछ तुमने पहले सुना है, वह सब उन रुद्रदेव के प्रभाव का ही परिणाम है॥142॥
 
Dhananjaya! I have repeatedly introduced you to Him as Krodhaja and whatever you have heard earlier is all the result of the influence of that Rudradev.॥ 142॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि नारायणीये द्विचत्वारिंशदधिकत्रिशततमोऽध्याय:॥ ३४२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें नारायणकी महिमाविषयक तीन सौ बयालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३४२॥

(दक्षिणात्य अधिक पाठके २ श्लोक मिलाकर कुल १४४ श्लोक हैं)
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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