श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 141
 
 
श्लोक  12.342.141 
निहतास्तेन वै पूर्वं हतवानसि यान् रिपून्।
अप्रमेयप्रभावं तं देवदेवमुमापतिम्।
नमस्व देवं प्रयतो विश्वेशं हरमक्षयम्॥ १४१॥
 
 
अनुवाद
जिन शत्रुओं का तुमने वध किया है, वे रुद्रदेव के हाथों पहले ही मारे जा चुके थे। उनका प्रभाव अपरिमित है। तुम उन देवाधिदेव, उमावल्लभ विश्वनाथ, पापनाशक एवं अमर महादेवजी को संयमित मन से नमस्कार करो।
 
The enemies whom you have killed were already killed by the hands of Rudradev. Their impact is immeasurable. You should salute those Devadhidev, Umavallabh Vishwanath, sinful and immortal Mahadevji with a balanced mind.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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