श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 132-133
 
 
श्लोक  12.342.132-133 
ऋषिभिर्ब्रह्मणा चैव विबुधैश्च सुपूजित:।
उवाच देवमीशानमीश: स जगतो हरि:॥ १३२॥
यस्त्वां वेत्ति स मां वेत्ति यस्त्वामनु स मामनु।
नावयोरन्तरं किंचिन्मा तेऽभूद् बुद्धिरन्यथा॥ १३३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् देवताओं, ऋषियों और ब्रह्माजी द्वारा परम पूजित भगवान हरि ने रुद्रदेव से कहा - 'प्रभो! जो आपको जानता है, वह मुझे भी जानता है। जो आपका अनुसरण करता है, वह मेरा भी अनुसरण करता है। हम दोनों में कोई भेद नहीं है। आप अपने मन में कोई विपरीत विचार न करें।॥ 132-133॥
 
Thereafter, Lord Hari, who is highly worshipped by the Gods, sages and Brahma, said to Rudradev - 'Lord! Whoever knows you, knows me as well. Whoever follows you, follows me as well. There is no difference between us. You should not have any contrary thoughts in your mind.॥ 132-133॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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