श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 131
 
 
श्लोक  12.342.131 
ततोऽथ वरदो देवो जितक्रोधो जितेन्द्रिय:।
प्रीतिमानभवत् तत्र रुद्रेण सह संगत:॥ १३१॥
 
 
अनुवाद
तब क्रोध और इन्द्रियों को जीतने वाले कल्याणकारी भगवान नारायण वहाँ बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने रुद्रदेव को हृदय से लगा लिया।
 
Then Narayana, the benevolent god who has conquered anger and the senses, became very happy there and embraced Rudradev. 131.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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