श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 129
 
 
श्लोक  12.342.129 
मया च सार्धं वरद विबुधैश्च महर्षिभि:।
प्रसादयाशु लोकानां शान्तिर्भवतु मा चिरम्॥ १२९॥
 
 
अनुवाद
वरद! आप देवताओं, ऋषियों और मुझ सहित इन प्रभु को शीघ्र प्रसन्न करें, जिससे सम्पूर्ण जगत् में शीघ्र ही शान्ति स्थापित हो जाए॥129॥
 
Varad! You please please this Lord quickly along with the Gods, sages and me, so that peace may be established in the entire world soon.'॥ 129॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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