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mahabharat 12.342.128: मैं किसी कारणवश उन्हीं भगवान नारायण की कृपा से उत्पन्न हुआ हूँ। हे प्रिये! आप भी पूर्व सृष्टि में उन्हीं भगवान के क्रोध से उत्पन्न हुए सनातन पुरुष हैं॥128॥   |   mahabharat अध्याय 12.342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 128
 
 
श्लोक  12.342.128 
अहं प्रसादजस्तस्य कुतश्चित् कारणान्तरे।
त्वं चैव क्रोधजस्तात पूर्वसर्गे सनातन:॥ १२८॥
 
 
अनुवाद
मैं किसी कारणवश उन्हीं भगवान नारायण की कृपा से उत्पन्न हुआ हूँ। हे प्रिये! आप भी पूर्व सृष्टि में उन्हीं भगवान के क्रोध से उत्पन्न हुए सनातन पुरुष हैं॥128॥
 
‘For some reason, I was born by the grace of the same Lord Narayana. O dear! You too are the eternal man born from the anger of the same Lord in the previous creation.॥ 128॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)