श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 127
 
 
श्लोक  12.342.127 
नरो नारायणश्चैव जातौ धर्मकुलोद्वहौ।
तपसा महता युक्तौ देवश्रेष्ठौ महाव्रतौ॥ १२७॥
 
 
अनुवाद
धर्म के कुल में उत्पन्न हुए ये दोनों महान व्रतपालक, देवताओं में श्रेष्ठ नर और नारायण महान तपस्या से संपन्न हैं ॥127॥
 
Born in the family of Dharma, these two great vow-keepers, the best of gods, Nara and Narayana, are endowed with great austerities. ॥127॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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