श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 124-125h
 
 
श्लोक  12.342.124-125h 
सोऽञ्जलिप्रग्रहो भूत्वा चतुर्वक्त्रो निरुक्तग:।
उवाच वचनं रुद्रं लोकानामस्तु वै शिवम्॥ १२४॥
न्यस्यायुधानि विश्वेश जगतो हितकाम्यया।
 
 
अनुवाद
निरुक्तगम्य भगवान चतुर्मुख ने हाथ जोड़कर रुद्रदेव से कहा - 'प्रभो! समस्त लोकों का कल्याण हो! विश्वेश्वर! जगत के कल्याण के लिए आप अपने शस्त्र त्याग दीजिए।' 124 1/2॥
 
Niruktagamya Lord Chaturmukh folded his hands and said to Rudradev - 'Lord! May there be prosperity for all the worlds! Vishweshwar! Lay down your weapons for the welfare of the world. 124 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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