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mahabharat 12.342.122-123: हे पाण्डुपुत्र! ऐसा अशुभ शकुन देखकर ब्रह्माजी देवताओं और महर्षियों के साथ युद्धस्थल पर शीघ्र ही पहुँचे ॥122-123॥   |   mahabharat अध्याय 12.342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 122-123
 
 
श्लोक  12.342.122-123 
तस्मिन्नेवं समुत्पन्ने निमित्ते पाण्डुनन्दन॥ १२२॥
ब्रह्मा वृतो देवगणैर्ऋषिभिश्च महात्मभि:।
आजगामाशु तं देशं यत्र युद्धमवर्तत॥ १२३॥
 
 
अनुवाद
हे पाण्डुपुत्र! ऐसा अशुभ शकुन देखकर ब्रह्माजी देवताओं और महर्षियों के साथ युद्धस्थल पर शीघ्र ही पहुँचे ॥122-123॥
 
O son of Pandu! On seeing such an ill omen, Lord Brahma, along with the Gods and great sages, hurried to the place where the battle was taking place. ॥122-123॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)