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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 121-122h
 
 
श्लोक  12.342.121-122h 
वसुधा संचकम्पे च नभश्च विचचाल ह।
निष्प्रभाणि च तेजांसि ब्रह्मा चैवासनच्युत:॥ १२१॥
अगाच्छोषं समुद्रश्च हिमवांश्च व्यशीर्यत।
 
 
अनुवाद
पृथ्वी काँपने लगी, आकाश व्याकुल हो उठा। सभी चमकीले पिंड (ग्रह, तारे आदि) प्रभावहीन हो गए। ब्रह्मा अपने आसन से गिर पड़े। समुद्र सूखने लगा और हिमालय फटने लगा। 121 1/2।
 
The earth started trembling, the sky became agitated. All the bright objects (planets and stars etc.) became ineffective. Brahma fell from his seat. The ocean started drying up and the Himalayas started ripping apart. 121 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)