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mahabharat 12.342.118-119: भगवान् श्री ने कहा - अर्जुन ! जब रुद्र और नारायण आपस में युद्ध करने लगे, तब समस्त लोकों के प्राणी सहसा व्याकुल हो गए । अग्निदेव यज्ञ में जलाए गए शुद्ध हविष्य को भी ग्रहण नहीं कर पा रहे थे । 118-119॥   |   mahabharat अध्याय 12.342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 118-119
 
 
श्लोक  12.342.118-119 
श्रीभगवानुवाच
तयो: संलग्नयोर्युद्धे रुद्रनारायणात्मनो:॥ ११८॥
उद्विग्ना: सहसा कृत्स्ना: सर्वे लोकास्तदाभवन्।
नागृह्णात् पावक: शुभ्रं मखेषु सुहुतं हवि:॥ ११९॥
 
 
अनुवाद
भगवान् श्री ने कहा - अर्जुन ! जब रुद्र और नारायण आपस में युद्ध करने लगे, तब समस्त लोकों के प्राणी सहसा व्याकुल हो गए । अग्निदेव यज्ञ में जलाए गए शुद्ध हविष्य को भी ग्रहण नहीं कर पा रहे थे । 118-119॥
 
Lord Shri said – Arjun! When Rudra and Narayana engaged in a fight with each other, all the living beings in all the worlds suddenly became restless. Agnidev was not able to accept even the pure havishya ritually burnt in the yagyas. 118-119॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)