श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 116-117h
 
 
श्लोक  12.342.116-117h 
क्षिप्तश्च सहसा तेन खण्डनं प्राप्तवांस्तदा॥ ११६॥
ततोऽहं खण्डपरशु: स्मृत: परशुखण्डनात्।
 
 
अनुवाद
नरकासुर द्वारा धारण किया गया वह फरसा रुद्र ने अचानक टुकड़े-टुकड़े कर दिया। चूँकि मेरा फरसा कट गया था, इसलिए मैं 'खंडपरशु' कहलाया।
 
That axe wielded by Naraka was suddenly cut into pieces by Rudra. Since my axe was cut, I am known as 'Khandaparashu'.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd