श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 114-115h
 
 
श्लोक  12.342.114-115h 
अथ रुद्र उपाधावत् तावृषी तपसान्वितौ।
तत एनं समुद्भूतं कण्ठे जग्राह पाणिना॥ ११४॥
नारायण: स विश्वात्मा तेनास्य शितिकण्ठता।
 
 
अनुवाद
यह देखकर रुद्र ने तपस्या में लीन उन ऋषियों पर आक्रमण कर दिया। तब विश्वात्मा नारायण ने अपने हाथों से उन आक्रमणकारी रुद्रदेव का कंठ पकड़ लिया। इससे उनका कंठ नीला पड़ गया और वे 'नीलकंठ' नाम से प्रसिद्ध हुए।
 
Seeing this, Rudra attacked those sages who were engaged in penance. Then Vishwatma Narayana caught the throat of those attacking Rudradev with his hands. Due to this, his throat became blue and hence he became famous by the name of 'Neelkanth'. 114 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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