श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 111-112
 
 
श्लोक  12.342.111-112 
वेगेन महता पार्थ पतन्नारायणोरसि॥ १११॥
ततस्तत् तेजसाऽऽविष्टा: केशा नारायणस्य ह।
बभूवुर्मुञ्जवर्णास्तु ततोऽहं मुञ्जकेशवान्॥ ११२॥
 
 
अनुवाद
पार्थ! उस समय उस त्रिशूल ने बड़े वेग से नारायण की छाती में छेद कर दिया। उससे निकली हुई अग्नि में प्रविष्ट होकर नारायण के केश मुंज के समान रंग के हो गए। इसी कारण मेरा नाम 'मुंजकेश' पड़ा। 111-112।
 
Parth! At that time that trident pierced Narayana's chest with great force. Narayana's hair became colored like Munj after getting caught in the fire emanating from it. Due to this my name became 'Munjkesh'. 111-112.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd