श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 109
 
 
श्लोक  12.342.109 
न चैवाकल्पयद् भागं दक्षो रुद्रस्य भारत।
ततो दधीचिवचनाद् दक्षयज्ञमपाहरत्॥ १०९॥
 
 
अनुवाद
उस यज्ञमें दक्षने रुद्रको कुछ भी भाग नहीं दिया था; अतः दधीचिकी सलाहसे रुद्रदेवने दक्षके यज्ञका विध्वंस कर दिया ॥109॥
 
India Dakshna had not given any part to Rudra in that yagya; Therefore, on the advice of Dadhichi, Rudradev destroyed Daksha's yagya. 109॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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