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mahabharat 12.342.107-108: जब पहले नर और नारायण ने धर्म के रथ पर आरूढ़ होकर गन्धमादन पर्वत पर अक्षय तपस्या की थी, उसी समय प्रजापति दक्ष का यज्ञ आरम्भ हुआ था ॥107-108॥   |   mahabharat अध्याय 12.342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 107-108
 
 
श्लोक  12.342.107-108 
नरनारायणौ पूर्वं तपस्तेपतुरव्ययम्॥ १०७॥
धर्मयानं समारूढौ पर्वते गन्धमादने।
तत्कालसमये चैव दक्षयज्ञो बभूव ह॥ १०८॥
 
 
अनुवाद
जब पहले नर और नारायण ने धर्म के रथ पर आरूढ़ होकर गन्धमादन पर्वत पर अक्षय तपस्या की थी, उसी समय प्रजापति दक्ष का यज्ञ आरम्भ हुआ था ॥107-108॥
 
When first Nara and Narayana mounted on the chariot of Dharma performed Akshaya Tapasya on the Gandhamadana mountain, at that very time the Yagna of Prajapati Daksha was started. ॥107-108॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)