Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.342.101-102h: कुन्तीपुत्र! मैं स्वयं हयग्रीव रूप में प्रकट होता हूँ जो सबको वर देता है। मैं स्वयं वेदों के मंत्रों के क्रम और उनके अक्षरों के विभाजन को जानता हूँ। | mahabharat अध्याय 12.342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुन्तीपुत्र! मैं स्वयं हयग्रीव रूप में प्रकट होता हूँ जो सबको वर देता है। मैं स्वयं वेदों के मंत्रों के क्रम और उनके अक्षरों के विभाजन को जानता हूँ।
Kunti's son! I myself appear in the form of Hayagriva who grants boons to everyone. I myself know the order and division of the Vedic mantras in the latter part and the division of their letters.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥