श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 342: सृष्टिकी प्रारम्भिक अवस्थाका वर्णन, ब्राह्मणोंकी महिमा बतानेवाली अनेक प्रकारकी संक्षिप्त कथाओंका उल्लेख, भगवन्नामोंके हेतु तथारुद्रके साथ होनेवाले युद्धमें नारायणकी विजय  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.342.10 
त्वमग्ने यज्ञानां होता विश्वेषां हितो देवानां मानुषाणां च जगत इति॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे अग्नि! आप यज्ञों में तत्पर हैं और समस्त देवताओं, मनुष्यों तथा सम्पूर्ण जगत के हितैषी हैं। 10॥
 
Aagne! You are involved in Yagyas and are well-wishers of all the gods, humans and the entire world. 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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