Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.341.5-7: अर्जुन बोले- हे भूत, वर्तमान और भविष्य तीनों कालों के स्वामी, समस्त भूतों के रचयिता, अविनाशी, जगत के आधार और समस्त लोकों को अभय देने वाले जगन्नाथ, भगवान, नारायणदेव! मैं आपके मुख से उन समस्त नामों का, जो महर्षियों ने बताए हैं तथा पुराणों और वेदों में कर्मानुसार कहे गए गुप्त नामों का भाष्य सुनना चाहता हूँ। प्रभु! केशव! उन नामों की उत्पत्ति आपके अतिरिक्त अन्य कोई नहीं बता सकता।।5-7।। | mahabharat अध्याय 12.341: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको अपने प्रभावका वर्णन करते हुए अपने नामोंकी व्युत्पत्ति एवं माहात्म्य बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अर्जुन बोले- हे भूत, वर्तमान और भविष्य तीनों कालों के स्वामी, समस्त भूतों के रचयिता, अविनाशी, जगत के आधार और समस्त लोकों को अभय देने वाले जगन्नाथ, भगवान, नारायणदेव! मैं आपके मुख से उन समस्त नामों का, जो महर्षियों ने बताए हैं तथा पुराणों और वेदों में कर्मानुसार कहे गए गुप्त नामों का भाष्य सुनना चाहता हूँ। प्रभु! केशव! उन नामों की उत्पत्ति आपके अतिरिक्त अन्य कोई नहीं बता सकता।।5-7।।
Arjun said- O Lord of the three times - past, present and future, the creator of all beings, the indestructible, the support of the world and the one who gives protection to all the worlds, Jagannath, Bhagwan, Narayandev! I want to hear from your mouth the explanation of all the names that have been given by the great sages and the secret names that have been read in the Puranas and Vedas according to karma. Prabhu! Keshav! No one else except you can tell the origin of those names. 5-7.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥