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mahabharat 12.341.45: अन्न, वेद, जल और अमृत ये सब पृश्नि कहलाते हैं। ये सदैव मेरे गर्भ में निवास करते हैं, इसलिए मेरा नाम 'पृश्निगर्भ' है।   |   mahabharat अध्याय 12.341: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको अपने प्रभावका वर्णन करते हुए अपने नामोंकी व्युत्पत्ति एवं माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.341.45 
पृश्निरित्युच्यते चान्नं वेद आपोऽमृतं तथा।
ममैतानि सदा गर्भ: पृश्निगर्भस्ततो ह्यहम्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
अन्न, वेद, जल और अमृत ये सब पृश्नि कहलाते हैं। ये सदैव मेरे गर्भ में निवास करते हैं, इसलिए मेरा नाम 'पृश्निगर्भ' है।
 
Food, Vedas, water and nectar are called Prishni. These always reside in my womb; hence my name is 'Prishnigarbha'.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)