Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.341.42-43: भरत! मैं समस्त प्राणियों की उत्पत्ति और गति का स्थान हूँ। पार्थ! मैंने आकाश और पृथ्वी को व्याप्त कर रखा है। मेरा तेज सबसे महान है। भरतपुत्र! मैं वह ब्रह्म हूँ जिसे समस्त प्राणी मृत्यु के समय प्राप्त करना चाहते हैं। कुन्तीपुत्र! मैं सबसे परे हूँ। इन्हीं सब कारणों से मेरा नाम 'विष्णु' है॥ 42-43॥ | mahabharat अध्याय 12.341: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको अपने प्रभावका वर्णन करते हुए अपने नामोंकी व्युत्पत्ति एवं माहात्म्य बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भरत! मैं समस्त प्राणियों की उत्पत्ति और गति का स्थान हूँ। पार्थ! मैंने आकाश और पृथ्वी को व्याप्त कर रखा है। मेरा तेज सबसे महान है। भरतपुत्र! मैं वह ब्रह्म हूँ जिसे समस्त प्राणी मृत्यु के समय प्राप्त करना चाहते हैं। कुन्तीपुत्र! मैं सबसे परे हूँ। इन्हीं सब कारणों से मेरा नाम 'विष्णु' है॥ 42-43॥
Bharata! I am the place of origin and movement of all living beings. Parth! I have pervaded the sky and the earth. My radiance is the greatest of all. Bharata's son! I am the Brahman that all living beings desire to attain at the time of death. Kunti's son! I exist transcending all. Due to all these reasons my name is 'Vishnu'*॥ 42-43॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥