Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.341.41: (जो सबमें व्याप्त है या जिसका निवास है, उसे 'वसु' कहते हैं।) मैं सूर्य का रूप धारण करके अपनी किरणों से सम्पूर्ण जगत् में व्याप्त हूँ और मैं ही समस्त प्राणियों का निवास हूँ, इसलिए मेरा नाम 'वासुदेव' है। 41। | mahabharat अध्याय 12.341: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको अपने प्रभावका वर्णन करते हुए अपने नामोंकी व्युत्पत्ति एवं माहात्म्य बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
छादयामि जगद् विश्वं भूत्वा सूर्य इवांशुभि:।
सर्वभूताधिवासश्च वासुदेवस्ततो ह्यहम्॥ ४१॥
अनुवाद
(जो सबमें व्याप्त है या जिसका निवास है, उसे 'वसु' कहते हैं।) मैं सूर्य का रूप धारण करके अपनी किरणों से सम्पूर्ण जगत् में व्याप्त हूँ और मैं ही समस्त प्राणियों का निवास हूँ, इसलिए मेरा नाम 'वासुदेव' है। 41।
(One who pervades everything or is someone's abode is called 'Vasu'.) Taking the form of the Sun, I pervade the entire universe with my rays and I am the abode of all living creatures; hence my name is 'Vasudev'. 41.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥