Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.341.38-39: भरत! मैं आध्यात्मिक योगों को जानता हूँ और यह भी जानता हूँ कि मैं कौन हूँ और कहाँ से आया हूँ। प्रवृत्ति धर्म जो सांसारिक समृद्धि का साधन है और निवृत्ति धर्म जो मोक्ष प्रदान करता है, वे भी मेरे लिए अज्ञात नहीं हैं। मैं ही सनातन पुरुष हूँ और समस्त मनुष्यों का आश्रय लेने वाला सुविख्यात नारायण हूँ। 38-39। | mahabharat अध्याय 12.341: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको अपने प्रभावका वर्णन करते हुए अपने नामोंकी व्युत्पत्ति एवं माहात्म्य बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भरत! मैं आध्यात्मिक योगों को जानता हूँ और यह भी जानता हूँ कि मैं कौन हूँ और कहाँ से आया हूँ। प्रवृत्ति धर्म जो सांसारिक समृद्धि का साधन है और निवृत्ति धर्म जो मोक्ष प्रदान करता है, वे भी मेरे लिए अज्ञात नहीं हैं। मैं ही सनातन पुरुष हूँ और समस्त मनुष्यों का आश्रय लेने वाला सुविख्यात नारायण हूँ। 38-39।
Bharata! I know the spiritual yogas and I also know who I am and where I have come from. The Pravritti Dharma which is the means of worldly prosperity and the Nivritti Dharma which provides salvation are also not unknown to me. I alone, the eternal man, am the well-known sheltering Narayana of all human beings. 38-39.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥