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mahabharat 12.341.37-38h: पार्थ! मैंने तुम्हें भक्तों का भेद बता दिया है। कुन्तीनंदन! तुम और मैं दोनों ही नर-नारायण नामक ऋषि हैं और पृथ्वी का भार उतारने के लिए हमने मानव शरीर धारण किया है।   |   mahabharat अध्याय 12.341: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको अपने प्रभावका वर्णन करते हुए अपने नामोंकी व्युत्पत्ति एवं माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.341.37-38h 
भक्तं प्रति विशेषस्ते एष पार्थानुकीर्तित:।
त्वं चैवाहं च कौन्तेय नरनारायणौ स्मृतौ॥ ३७॥
भारावतरणार्थं तु प्रविष्टौ मानुषीं तनुम्।
 
 
अनुवाद
पार्थ! मैंने तुम्हें भक्तों का भेद बता दिया है। कुन्तीनंदन! तुम और मैं दोनों ही नर-नारायण नामक ऋषि हैं और पृथ्वी का भार उतारने के लिए हमने मानव शरीर धारण किया है।
 
Parth! I have told you the difference between devotees. Kunti Nandan! You and I both are sages named Nara-Narayana and we have entered human bodies to relieve the burden of the earth. 37 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)