Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.341.35: शेष तीन प्रकार के भक्त फल की इच्छा रखने वाले माने गए हैं। अतः वे सब ही अधोगति को प्राप्त होने वाले हैं - पुण्यों का भोग करके वे स्वर्गलोकों से च्युत हो जाते हैं, परन्तु ज्ञानी भक्त उत्तम फल (परमात्मा की प्राप्ति) को प्राप्त होता है। 35॥ | mahabharat अध्याय 12.341: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको अपने प्रभावका वर्णन करते हुए अपने नामोंकी व्युत्पत्ति एवं माहात्म्य बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ये च शिष्टास्त्रयो भक्ता: फलकामा हि ते मता:।
सर्वे च्यवनधर्मास्ते प्रतिबुद्धस्तु श्रेष्ठभाक्॥ ३५॥
अनुवाद
शेष तीन प्रकार के भक्त फल की इच्छा रखने वाले माने गए हैं। अतः वे सब ही अधोगति को प्राप्त होने वाले हैं - पुण्यों का भोग करके वे स्वर्गलोकों से च्युत हो जाते हैं, परन्तु ज्ञानी भक्त उत्तम फल (परमात्मा की प्राप्ति) को प्राप्त होता है। 35॥
The remaining three types of devotees are considered to be desirous of results. Therefore, all of them are going to fall down - after enjoying the virtues, they are lost from the heavenly worlds, but the knowledgeable devotee gets the best result (attainment of God). 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥