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mahabharat 12.341.31-32h: भरतनंदन! भगवान विष्णु भूत, भविष्य और वर्तमान में विद्यमान समस्त मनुष्यों में श्रेष्ठ हैं। अतः सभी को सदैव उनकी सेवा और पूजा करनी चाहिए। 31 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.341: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको अपने प्रभावका वर्णन करते हुए अपने नामोंकी व्युत्पत्ति एवं माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 341: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको अपने प्रभावका वर्णन करते हुए अपने नामोंकी व्युत्पत्ति एवं माहात्म्य बताना  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  12.341.31-32h 
भविष्यतां वर्ततां च भूतानां चैव भारत॥ ३१॥
सर्वेषामग्रणीर्विष्णु: सेव्य: पूज्यश्च नित्यश:।
 
 
अनुवाद
भरतनंदन! भगवान विष्णु भूत, भविष्य और वर्तमान में विद्यमान समस्त मनुष्यों में श्रेष्ठ हैं। अतः सभी को सदैव उनकी सेवा और पूजा करनी चाहिए। 31 1/2॥
 
Bharatnandan! Lord Vishnu is the foremost among all the men who exist in the past, future and present. Therefore, everyone should always serve and worship him. 31 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)