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mahabharat 12.341.3: वैशम्पायनजी बोले - राजन! जिस प्रकार भगवान श्रीहरि ने स्वयं अर्जुन पर प्रसन्न होकर उसके गुण और कर्म के अनुसार उसके नाम बताए थे, उसे मैं तुमसे कहता हूँ। सुनो॥   |   mahabharat अध्याय 12.341: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको अपने प्रभावका वर्णन करते हुए अपने नामोंकी व्युत्पत्ति एवं माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 341: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको अपने प्रभावका वर्णन करते हुए अपने नामोंकी व्युत्पत्ति एवं माहात्म्य बताना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.341.3 
वैशम्पायन उवाच
शृणु राजन् यथाऽऽचष्ट फाल्गुनस्य हरि: प्रभु:।
प्रसन्नात्माऽऽत्मनो नाम्नां निरुक्तं गुणकर्मजम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी बोले - राजन! जिस प्रकार भगवान श्रीहरि ने स्वयं अर्जुन पर प्रसन्न होकर उसके गुण और कर्म के अनुसार उसके नाम बताए थे, उसे मैं तुमसे कहता हूँ। सुनो॥
 
Vaishampayanji said – King! Listen, I am narrating to you the way Lord Shri Hari himself, being pleased with Arjun, explained his names to him according to his qualities and deeds. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)