Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.341.27: कुन्तीनन्दन! रुद्र और नारायण दोनों एक ही स्वरूप हैं, जो दो रूप धारण करके भिन्न-भिन्न व्यक्तियों में निवास करते हैं और संसार में यज्ञ आदि समस्त कार्यों में लगे रहते हैं। 27॥ | mahabharat अध्याय 12.341: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको अपने प्रभावका वर्णन करते हुए अपने नामोंकी व्युत्पत्ति एवं माहात्म्य बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुन्तीनन्दन! रुद्र और नारायण दोनों एक ही स्वरूप हैं, जो दो रूप धारण करके भिन्न-भिन्न व्यक्तियों में निवास करते हैं और संसार में यज्ञ आदि समस्त कार्यों में लगे रहते हैं। 27॥
Kuntinandan! Both Rudra and Narayan are the same form, who assume two forms and reside in different persons and are engaged in all the activities like Yagya etc. in the world. 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥